स्वरूप और तत्व
स्वरूप
क्षत्रिय (राजसी/योद्धा), सात्विक, पित्त (अग्नि/तेज), क्रूर ग्रह (कृपा-क्रूर / अनुशासनप्रिय पिता)
नवग्रह गाइड
Sun
नवग्रह मंडल के राजा, आत्मकारक (आत्मा के कारक), पिता, प्राणशक्ति और प्रभुसत्ता के अधिष्ठाता
स्वरूप और तत्व
क्षत्रिय (राजसी/योद्धा), सात्विक, पित्त (अग्नि/तेज), क्रूर ग्रह (कृपा-क्रूर / अनुशासनप्रिय पिता)
उत्सर्जित ऊर्जा
प्रखर सौर ऊर्जा, रक्त-नारंगी ब्रह्मांडीय किरणें, जीवनदायिनी प्राण ऊष्मा और आध्यात्मिक प्रकाश
दिशा
दिशा
पूर्व दिशा
मंडल स्थिति
नवग्रह मंडल का केंद्र
देवता
अधिष्ठाता देवता
भगवान सूर्य / सवितृ
Adhidevata
अग्नि देव
Pratyadhidevata
भगवान रुद्र / शिव
मंत्र
बीज मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
वैदिक मंत्र
ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्॥
जप संख्या 7000
रत्न
मुख्य रत्न
माणिक्य (माणिक / रूबी)
उप रत्न
रक्तमणि (गार्नेट), लाल स्पिनल, सनस्टोन
धातु
सोना या तांबा
अँगुली और समय
अनामिका उंगली (Ring finger) में शुक्ल पक्ष के रविवार को सूर्योदय के समय
शुभ प्रभाव
उच्च आत्मबल, तेजस्वी व्यक्तित्व, उत्तम स्वास्थ्य, हृदय व अस्थि बल, नेतृत्व क्षमता, राजकीय सफलता और मान-सम्मान।
पीड़ित प्रभाव
अत्यधिक अहंकार, नेत्र विकार, हृदय रोग, पित्त असंतुलन, सिरदर्द, पिता से मतभेद और मानहानि।
कालिक बल
सबसे प्रभावी समय
मध्याह्न (दोपहर 12 बजे / दशम भाव में दिग्बल), ग्रीष्म संक्रांति (उत्तरायण), सिंह राशि गोचर और 6 वर्षीय सूर्य महादशा।
न्यूनतम प्रभावी समय
मध्यरात्रि, सूर्य ग्रहण काल, तुला राशि (नीच स्थान) और शीत संक्रांति।