केतु (South Lunar Node (Dragon's Tail / Shadow Planet))

नवग्रह गाइड

केतु

South Lunar Node (Dragon's Tail / Shadow Planet)

मोक्षकारक, वैराग्य, पराविद्या (गूढ़ ज्ञान), तंत्र-मंत्र, पूर्वजन्म के संचित कर्म और सूक्ष्म अंतर्ज्ञान के अधिष्ठाता

ईशान / केंद्रीय अक्ष लहसुनिया (वैदूर्य मणि / कैट्स आई) जप 17000

स्वरूप और तत्व

स्वरूप

संन्यासी (वैरागी), तामसिक-सात्विक मिश्रित, पित्त (धूम्र अग्नि), आध्यात्मिक क्रूर छाया ग्रह

उत्सर्जित ऊर्जा

ऊर्जा

अवरक्त (इन्फ्रारेड) सूक्ष्म कंपन, विखंडनकारी ऊर्जा, अंतर्मुखी आध्यात्मिक प्रकाश और शून्य स्थिति

दिशा

दिशा और मंडल

दिशा

ईशान / केंद्रीय अक्ष

मंडल स्थिति

सूर्य के सापेक्ष वायव्य (वैदिक) / ईशान (आगम)

देवता

अधिष्ठाता देवता

अधिष्ठाता देवता

भगवान केतु

Adhidevata

चित्रगुप्त / ब्रह्मा जी

Pratyadhidevata

भगवान गणेश / ब्रह्मा जी

मंत्र

जप मंत्र

बीज मंत्र

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

वैदिक मंत्र

ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे। समुषद्भिरजायथाः॥

जप संख्या 17000

रत्न

रत्न और धातु

मुख्य रत्न

लहसुनिया (वैदूर्य मणि / कैट्स आई)

उप रत्न

टाइगर आई, फिरोजा (टर्कोइश), फाइब्रोलाइट

धातु

चांदी, सोना या पंचधातु

अँगुली और समय

मध्यमा (Middle) या अनामिका (Ring) उंगली में शुक्ल पक्ष के मंगलवार या गुरुवार की रात्रि को

शुभ प्रभाव

जब बलवान

आध्यात्मिक मोक्ष, गूढ़ विद्याओं व ज्योतिष में निपुणता, तीव्र अंतर्ज्ञान, वैराग्य और भौतिक बंधनों से मुक्ति।

पीड़ित प्रभाव

जब पीड़ित

रहस्यमयी असाध्य रोग, त्वचा विकार, फोड़े-फुंसी, भटकाव, दुर्घटनाएं, मतिभ्रम और परिजनों से अचानक विछोह।

कालिक बल

कब सबसे प्रभावी

सबसे प्रभावी समय

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व), ग्रहण काल, वृश्चिक/धनु राशि गोचर और 7 वर्षीय केतु महादशा।

न्यूनतम प्रभावी समय

मध्याह्न का समय, वृषभ/मिथुन राशि गोचर और अत्यधिक भौतिकवादी वातावरण।