मास · ऋतु · पक्ष · चंद्र

हिंदू पवित्र कैलेंडर — मास, ऋतु, पक्ष और चंद्र

पवित्र मास, ऋतुएँ, पक्ष, आवर्ती व्रत और इंटरैक्टिव चंद्र-आकार गाइड

सनातन धर्म पवित्रता को काल पर चित्रित करता है: चंद्र पक्ष, छह ऋतुएँ, देवता-पर्वयुक्त पवित्र मास, तथा एकादशी और प्रदोष जैसी आवर्ती वेलाएँ। ये गाइड प्रत्येक विषय को हिंदी-अंग्रेज़ी में विस्तार देते हैं—और रात-रात चंद्रमा का बदलता रूप देखने का आमंत्रण भी।

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ऋतु · मास · पक्ष · तिथि

पवित्र काल के भीतर काल

छह ऋतुओं से बारह मास, दो पक्षों और तीस तिथियों तक—हर वलय अगले स्तर को संदर्भ देता है।

आवर्ती पवित्र काल पूरे चक्र पर आते हैं
एकादशीप्रदोषचतुर्मासअधिक मास (पुरुषोत्तम मास)

चंद्र पक्ष

पवित्र मास

July – August श्रावण (सावन) श्रावण भक्ति का वर्षाकालीन हृदय है। नदियाँ उमड़ती हैं, वन हरे होते हैं और शैव साधना गहन होती है। गृहस्थ सात्त्विक भोजन, सोमवार शिवलिंग अभिषेक और मंगल गौरी व्रत अपनाते हैं। कांवड़ य… August – September भाद्रपद (भादो) भाद्रपद जयंतियों से खिलता है—कृष्ण की अर्धरात्रि जन्म, गणेश आगमन और राधा प्राकट्य। यह मास लीला-भक्ति, विघ्नहारी आरंभ और प्रेम भक्ति की मिठास देता है।… September – October आश्विन आश्विन पितृपक्ष की स्मृति से शरद नवरात्रि की शक्ति तक, फिर विजयादशमी की विजय तक जाता है। पूर्वजों का सम्मान और देवी का साहस एक-दूसरे को पूर्ण करते हैं।… October – November कार्तिक कार्तिक दीप-मास है—वैष्णव और सार्वभौम पुण्य का। प्रभात स्नान, दीपदान, तुलसी पूजा और दीपावली का प्रकाश वर्ष को ज्योति की ओर ले जाता है। देवउठानी एकादशी पर चतुर्मास समाप्त—विष्णु योग… November – December मार्गशीर्ष गीता (१०.३५) में कृष्ण कहते हैं—मासों में मैं मार्गशीर्ष हूँ। शीत की स्वच्छता गीता अध्ययन, संध्या और शांत संकल्प के अनुकूल है।… January – February माघ माघ सूर्य की उत्तरायण यात्रा की ओर मुड़ता है। पुण्य स्नान, सूर्य आराधना और सरस्वती की विद्या-धारा साधक को नवीनीकरण के लिए तैयार करती हैं।… February – March फाल्गुन फाल्गुन पारंपरिक वर्ष को शिव की महारात और होली की अग्नि-रंग रसायन से समेटता है—भय का विलय, आनंद का जन्म।… March – April चैत्र चैत्र चंद्र वर्ष खोलता है—उगादी/गुड़ी पड़वा, वसंत नवरात्रि, राम नवमी और हनुमान जयंती। सृजन ऊर्जा नैतिक ओज के साथ लौटती है।… April – May वैशाख वैशाख दान को बढ़ाता है—जल, अन्न और आश्रय। अक्षय तृतीया का अटूट पुण्य, नृसिंह की उग्र कृपा और बुद्ध पूर्णिमा की करुणा एक ही आकाश में मिलते हैं।…

छह ऋतुएँ

आवर्ती पवित्र काल

एकादशी प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि विष्णु का विशेष व्रत दिन है। अन्न-दाल त्याग शरीर को हल्का कर मन को नाम-स्मरण में स्थिर करता है। प्रसिद्ध एकादशियाँ वर्ष को अलग म… प्रदोष प्रदोष त्रयोदशी की लगभग तीन घंटे की संध्या वेला है, शिव को पवित्र। संध्या अभिषेक और मंत्र कर्म ग्रंथियाँ खोलते माने जाते हैं—जब दिन और रात मिलते हैं।… चतुर्मास आषाढ़ एकादशी से कार्तिक एकादशी तक चार मास जब विष्णु योगनिद्रा में माने जाते हैं। संन्यासी यात्रा कम करते हैं; गृहस्थ आहार सरल और अध्ययन गहन करते हैं—बाह्य ऋतु औ… अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) लगभग प्रत्येक ३२.५ मास में चंद्र-सौर वर्ष संरेखण हेतु अतिरिक्त चंद्र मास। जाप, ध्यान और दान को समर्पित—विष्णु के नाम पर पुरुषोत्तम मास।…