स्वरूप और तत्व
स्वरूप
क्षत्रिय (सेनापति/योद्धा), तामसिक, पित्त (अग्नि तत्व), नैसर्गिक क्रूर ग्रह
नवग्रह गाइड
Mars
सेनापति, पराक्रम, साहस, अनुज (छोटे भाई-बहन), भूमि/अचल संपत्ति, रक्त और शारीरिक बल के अधिष्ठाता
स्वरूप और तत्व
क्षत्रिय (सेनापति/योद्धा), तामसिक, पित्त (अग्नि तत्व), नैसर्गिक क्रूर ग्रह
उत्सर्जित ऊर्जा
तीव्र ऊष्मीय विकिरण, लाल ऊर्जावान तरंगें, गतिज शक्ति और आक्रामकता
दिशा
दिशा
दक्षिण दिशा
मंडल स्थिति
सूर्य के सापेक्ष दक्षिण (वैदिक) / दक्षिण-पूर्व (आगम)
देवता
अधिष्ठाता देवता
भगवान मंगल / अंगारक
Adhidevata
भूमि देवी (पृथ्वी माता)
Pratyadhidevata
भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) / क्षेत्रपाल
मंत्र
बीज मंत्र
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
वैदिक मंत्र
ॐ अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्। अपां रेतां सि जिन्वति॥
जप संख्या 10000
रत्न
मुख्य रत्न
लाल मूंगा (प्रवाल / कोरल)
उप रत्न
रक्त कार्नेलियन, लाल जैस्पर
धातु
सोना, तांबा या पंचधातु
अँगुली और समय
अनामिका उंगली (Ring finger) में शुक्ल पक्ष के मंगलवार को प्रातः काल
शुभ प्रभाव
अदम्य साहस, प्रशासनिक व तकनीकी कौशल, भूमि-भवन का लाभ, खेलकूद व सेना में सफलता और नेतृत्व क्षमता।
पीड़ित प्रभाव
अत्यधिक क्रोध, रक्त विकार, दुर्घटनाएं, अग्नि व शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के कष्ट, मुकदमेबाजी और मांगलिक दोष।
कालिक बल
सबसे प्रभावी समय
मध्याह्न काल (दशम भाव में दिग्बल), मकर राशि गोचर (उच्च), मंगलवार दोपहर और 7 वर्षीय मंगल महादशा।
न्यूनतम प्रभावी समय
मध्यरात्रि, कर्क राशि गोचर (नीच) और सूर्य के साथ निकट अस्त अवस्था।