शुक्र (Venus)

नवग्रह गाइड

शुक्र

Venus

सौंदर्य, कला, प्रेम, वैवाहिक सुख, विलासिता, वाहन, ऐश्वर्य और शुक्र धातु (वीर्य/प्रजनन शक्ति) के स्वामी

आग्नेय कोण (South-East) हीरा (वज्र / डायमंड) जप 16000

स्वरूप और तत्व

स्वरूप

ब्राह्मण (दैत्यगुरु/सलाहकार), राजसिक, कफ-वात (जल तत्व), परम शुभ ग्रह

उत्सर्जित ऊर्जा

ऊर्जा

अत्यंत श्वेत चमकीला प्रकाश, सूक्ष्म कलात्मक तरंगें, सम्मोहक आकर्षण और काम शक्ति

दिशा

दिशा और मंडल

दिशा

आग्नेय कोण (South-East)

मंडल स्थिति

सूर्य के सापेक्ष पूर्व (वैदिक) / उत्तर (आगम)

देवता

अधिष्ठाता देवता

अधिष्ठाता देवता

शुक्राचार्य

Adhidevata

इंद्राणी (शची देवी)

Pratyadhidevata

इंद्र देव / महालक्ष्मी

मंत्र

जप मंत्र

बीज मंत्र

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

वैदिक मंत्र

ॐ अन्नात्परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पयः सोमं प्रजापतिः। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु॥

जप संख्या 16000

रत्न

रत्न और धातु

मुख्य रत्न

हीरा (वज्र / डायमंड)

उप रत्न

सफेद जरकन, सफेद पुखराज, सफेद ओपल

धातु

प्लैटिनम, सफेद सोना या चांदी

अँगुली और समय

मध्यमा (Middle) या कनिष्ठिका (Little) उंगली में शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को प्रातः काल

शुभ प्रभाव

जब बलवान

आकर्षक व्यक्तित्व, कलात्मक सफलता, वैवाहिक आनंद, भौतिक सुख-सुविधाएं, वाहन सुख और अकूत धन-संपत्ति।

पीड़ित प्रभाव

जब पीड़ित

मधुमेह, गुप्त रोग, किडनी संबंधी विकार, वैवाहिक जीवन में कलह, अत्यधिक विलासिता से धनहानि और बदनामी।

कालिक बल

कब सबसे प्रभावी

सबसे प्रभावी समय

मध्यरात्रि (चतुर्थ भाव में दिग्बल), भोर का समय (सूर्योदय से पूर्व), मीन राशि गोचर (उच्च) और 20 वर्षीय शुक्र महादशा।

न्यूनतम प्रभावी समय

दोपहर का समय, कन्या राशि गोचर (नीच) और सूर्य के साथ अस्त अवस्था।