गुरु / बृहस्पति (Jupiter)

नवग्रह गाइड

गुरु / बृहस्पति

Jupiter

देवगुरु, धर्म, ज्ञान, विवेक, उच्च शिक्षा, संतान, भाग्य, धन और गुरु कृपा के कारक

ईशान कोण (North-East) पुखराज (पुष्पराग / येलो नीलम) जप 19000

स्वरूप और तत्व

स्वरूप

ब्राह्मण (आचार्य/मंत्री), सात्विक, कफ (आकाश तत्व), परम नैसर्गिक शुभ ग्रह

उत्सर्जित ऊर्जा

ऊर्जा

विस्तारवादी स्वर्णिम-पीली ब्रह्मांडीय किरणें, उच्च आध्यात्मिक ईथर तरंगें और नैतिक चेतना

दिशा

दिशा और मंडल

दिशा

ईशान कोण (North-East)

मंडल स्थिति

सूर्य के सापेक्ष उत्तर (वैदिक) / पश्चिम (आगम)

देवता

अधिष्ठाता देवता

अधिष्ठाता देवता

देवगुरु बृहस्पति

Adhidevata

इंद्र देव / ब्रह्मा जी

Pratyadhidevata

भगवान ब्रह्मा / परमेष्ठी

मंत्र

जप मंत्र

बीज मंत्र

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

वैदिक मंत्र

ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्छवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्॥

जप संख्या 19000

रत्न

रत्न और धातु

मुख्य रत्न

पुखराज (पुष्पराग / येलो नीलम)

उप रत्न

पीला पुखराज (येलो टोपाज), सुनहला (सिट्रीन), पीला बेरिल

धातु

शुद्ध सोना या पंचधातु

अँगुली और समय

तर्जनी उंगली (Index finger) में शुक्ल पक्ष के गुरुवार को प्रातः काल

शुभ प्रभाव

जब बलवान

अगाध आध्यात्मिक ज्ञान, उच्च पद, वित्तीय समृद्धि, उत्तम संतान सुख, सम्मान और दैवीय कृपा।

पीड़ित प्रभाव

जब पीड़ित

लीवर व पाचन संबंधी विकार, मोटापा, संतान प्राप्ति में विलंब, आर्थिक संकट और रूढ़िवादिता।

कालिक बल

कब सबसे प्रभावी

सबसे प्रभावी समय

प्रातः काल (प्रथम भाव में दिग्बल), कर्क राशि गोचर (उच्च), धनु व मीन राशि और 16 वर्षीय गुरु महादशा।

न्यूनतम प्रभावी समय

संध्या काल, मकर राशि गोचर (नीच) और ग्रह युद्ध में पराजित अवस्था।