शनि (Saturn)

नवग्रह गाइड

शनि

Saturn

दंडाधिकारी एवं न्यायाधीश (कर्मफलदाता), आयुकारक, धैर्य, श्रम, वैराग्य, दुख और अनुशासन के अधिष्ठाता

पश्चिम दिशा नीलम (इंद्रनील / ब्लू सफायर) जप 23000

स्वरूप और तत्व

स्वरूप

शूद्र (श्रमजीवी/सेवक), तामसिक, वात (वायु तत्व), नैसर्गिक क्रूर व कर्मफलदाता

उत्सर्जित ऊर्जा

ऊर्जा

गहरी नीली व पराबैंगनी (अल्ट्रावायलेट) तरंगें, मंद गुरुत्वाकर्षण कंपन, अंतर्मुखी शीतल ऊर्जा

दिशा

दिशा और मंडल

दिशा

पश्चिम दिशा

मंडल स्थिति

सूर्य के सापेक्ष पश्चिम (वैदिक) / नैऋत्य (आगम)

देवता

अधिष्ठाता देवता

अधिष्ठाता देवता

भगवान शनि / शनैश्चर

Adhidevata

प्रजापति / ब्रह्मा जी

Pratyadhidevata

यमराज (मृत्यु व न्याय के देव)

मंत्र

जप मंत्र

बीज मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

वैदिक मंत्र

ॐ शं नो देवीरभिष्टये आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु नः॥

जप संख्या 23000

रत्न

रत्न और धातु

मुख्य रत्न

नीलम (इंद्रनील / ब्लू सफायर)

उप रत्न

जामुनिया (एमेथिस्ट), नीली (आयलाइट), लाजवर्त (लॅपिस लाजुली)

धातु

लोहा, सीसा (लेड), अष्टधातु या पंचधातु

अँगुली और समय

मध्यमा उंगली (Middle finger) में शुक्ल पक्ष के शनिवार को सूर्यास्त के समय (विधिपूर्वक परीक्षण अनिवार्य)

शुभ प्रभाव

जब बलवान

अटूट धैर्य, कठोर अनुशासन, जनसमूह का नेतृत्व, दीर्घायु, विनम्रता, न्यायप्रियता और चिरस्थायी सफलता।

पीड़ित प्रभाव

जब पीड़ित

दीर्घकालिक रोग, जोड़ों व हड्डियों के विकार, अवसाद, अत्यधिक विलंब, दरिद्रता, कानूनी दंड और अलगाव।

कालिक बल

कब सबसे प्रभावी

सबसे प्रभावी समय

सूर्यास्त व गोधूलि वेला (सप्तम भाव में दिग्बल), तुला राशि गोचर (उच्च), साढ़ेसाती/ढैय्या काल और 19 वर्षीय शनि महादशा।

न्यूनतम प्रभावी समय

सूर्योदय व दोपहर, मेष राशि गोचर (नीच) और तीव्र मार्गी गति।