स्वरूप और तत्व
स्वरूप
म्लेच्छ (विदेशी/परंपरा विरोधी), तामसिक, वात (धूम्र/छाया तत्व - मायावी), नैसर्गिक क्रूर छाया ग्रह
नवग्रह गाइड
North Lunar Node (Dragon's Head / Shadow Planet)
मायावी शक्ति, तीव्र महत्वाकांक्षा, सांसारिक लिप्सा, विदेशी यात्राएं, तकनीक, आकस्मिक परिवर्तन और भ्रम के कारक
स्वरूप और तत्व
म्लेच्छ (विदेशी/परंपरा विरोधी), तामसिक, वात (धूम्र/छाया तत्व - मायावी), नैसर्गिक क्रूर छाया ग्रह
उत्सर्जित ऊर्जा
अदृश्य पराबैंगनी/अवरक्त सीमांत तरंगें, अस्थिर चुंबकीय कंपन और अति-प्रवर्धक छाया ऊर्जा
दिशा
दिशा
नैऋत्य कोण (South-West)
मंडल स्थिति
सूर्य के सापेक्ष नैऋत्य (वैदिक) / वायव्य (आगम)
देवता
अधिष्ठाता देवता
भगवान राहु
Adhidevata
माँ दुर्गा / सिंहिका
Pratyadhidevata
सर्प देव (नागराज) / काल भैरव
मंत्र
बीज मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
वैदिक मंत्र
ॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृधः सखा। कया शचिष्ठया वृता॥
जप संख्या 18000
रत्न
मुख्य रत्न
गोमेद (हेसोनाइट गार्नेट)
उप रत्न
नारंगी जरकन, भूरा टूमलाइन, गोमेदक (अकीक)
धातु
चांदी, सीसा या पंचधातु
अँगुली और समय
मध्यमा उंगली (Middle finger) में शुक्ल पक्ष के शनिवार या बुधवार की रात्रि को
शुभ प्रभाव
अचानक अकूत धनलाभ, कूटनीति व राजनीति में विजय, विदेशी भूमि से लाभ, तकनीकी शोध और तीव्र बौद्धिक चातुर्य।
पीड़ित प्रभाव
मानसिक भ्रम, भय, अनिद्रा, व्यसन, धोखाधड़ी, रहस्यमयी रोग, षड्यंत्र और अचानक भारी आर्थिक क्षति।
कालिक बल
सबसे प्रभावी समय
सूर्य व चंद्र ग्रहण काल, गहन अंधकार युक्त रात्रि, वृषभ/मिथुन राशि गोचर, राहुकाल और 18 वर्षीय राहु महादशा।
न्यूनतम प्रभावी समय
दोपहर का प्रखर प्रकाश, वृश्चिक/धनु राशि गोचर और शुभ गुरु की पूर्ण दृष्टि अवस्था।