कब और क्यों
पारंपरिक समय-नियम
प्रत्येक सोमवार को मनाया जाता है, और पवित्र श्रावण मास (जुलाई/अगस्त) के दौरान इसका विशेष महत्व होता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
परंपरा · समय-नियम · सुरक्षित अभ्यास
पारंपरिक उद्देश्य: भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने, चंचल मन को शांत करने, योग्य जीवनसाथी पाने या वैवाहिक व घरेलू सुख-शांति के लिए।
प्रत्येक सोमवार को मनाया जाता है, और पवित्र श्रावण मास (जुलाई/अगस्त) के दौरान इसका विशेष महत्व होता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
सोमवार की शाम की अनुष्ठानिक पूजा करने, भगवान शिव को प्रार्थना अर्पित करने और उसके बाद हल्का सात्विक भोजन करके व्रत खोलने से व्रत पूर्ण माना जाता है।