पावन कथा

सोलह सोमवार व्रत कथा

भगवान शिव को समर्पित १६ लगातार सोमवार व्रत की महिमा का वर्णन करने वाली प्रसिद्ध कथा। यह कथा दर्शाती है कि निष्कपट भाव, संयमित व्रत और शिव-पार्वती की भक्ति से असंभव कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं और सुख-समृद्धि मिलती है।

संबद्ध देव-देवी

अध्याय 1

शिव-पार्वती का अमरावती आगमन एवं पुजारी पर कृपा

भगवान शिव और माता पार्वती अमरावती नगर के एक सुंदर मंदिर में पधारे। क्रीड़ा के दौरान माता पार्वती ने चौपड़ खेलने का प्रस्ताव रखा। खेल समाप्त होने से पूर्व ही मंदिर के पुजारी ने शिव जी की विजय की भविष्यवाणी कर दी, किंतु अंत में पार्वती जी जीत गईं। असत्य बोलने के कारण पार्वती जी ने पुजारी को कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। बाद में देवकन्याओं के बताने पर पुजारी ने भक्तिभाव से १६ सोमवार का व्रत किया और शापमुक्त होकर पूर्ण स्वस्थ हो गया।

पठन संदर्भ

कथा, पाठांतर और अभ्यास

यह सार्वजनिक गाइड एक संक्षिप्त भक्तिपूर्ण पुनर्कथन है। विभिन्न पुराणों, रामायण परंपराओं, क्षेत्रों और संप्रदायों में प्रसंग व विवरण अलग हो सकते हैं।

  • पहले कथा पढ़ें, फिर नीचे दिए कथा-पाठ पर विचार करें।
  • व्रत या विधिवत पाठ के लिए अपने परिवार या परंपरा के स्वीकृत संस्करण का प्रयोग करें।
  • संबद्ध देवता गाइड से प्रतीक और उपासना संदर्भ समझें।

कथा-पाठ

सोलह सोमवार की अटल श्रद्धा तन, संबंध और टूटे अहंकार को सुधारती है।

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