कब और क्यों
पारंपरिक समय-नियम
हिन्दू मास चैत्र (मार्च/अप्रैल) में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
परंपरा · समय-नियम · सुरक्षित अभ्यास
पारंपरिक उद्देश्य: भगवान राम के जन्म का जश्न मनाने, धर्म के सिद्धांतों (मर्यादा पुरुषोत्तम) का सम्मान करने और जीवन में नैतिक शक्ति व स्पष्टता का आह्वान करने के लिए।
हिन्दू मास चैत्र (मार्च/अप्रैल) में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
दिन का उपवास पूरा करने, दोपहर 12:00 बजे (भगवान राम के जन्म का समय) मध्याह्न पूजा करने और उसके बाद व्रत का पारण करने से व्रत पूर्ण माना जाता है।