कब और क्यों
पारंपरिक समय-नियम
प्रत्येक सप्ताह मंगलवार (भगवान हनुमान को समर्पित) या शनिवार (भगवान शनि को समर्पित) को मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
परंपरा · समय-नियम · सुरक्षित अभ्यास
पारंपरिक उद्देश्य: ग्रहों के अशुभ प्रभावों (मंगल और शनि) को शांत करने, भय को दूर करने, पुरानी बाधाओं को पार करने और साहस, अनुशासन व सहनशक्ति प्राप्त करने के लिए।
प्रत्येक सप्ताह मंगलवार (भगवान हनुमान को समर्पित) या शनिवार (भगवान शनि को समर्पित) को मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
साप्ताहिक आहार प्रतिबंध को पूरा करने, हनुमान या शनि को प्रार्थना अर्पित करने और अनुशासन व दान के कार्यों में संलग्न होने से व्रत पूर्ण माना जाता है।