कब और क्यों
पारंपरिक समय-नियम
प्रत्येक चंद्र मास के अमावस्या (चंद्रमा विहीन) के दिन मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
परंपरा · समय-नियम · सुरक्षित अभ्यास
पारंपरिक उद्देश्य: पूर्वजों का सम्मान करने और उनका आशीर्वाद लेने (पितृ तर्पण), पैतृक कर्मों को साफ करने और कम चंद्र ऊर्जा चरणों के दौरान आध्यात्मिक आत्मनिरीक्षण करने के लिए।
प्रत्येक चंद्र मास के अमावस्या (चंद्रमा विहीन) के दिन मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
दिन के दौरान पितृ तर्पण/दान कर्तव्यों को पूरा करने, शुद्ध आहार बनाए रखने और वंश की शांति के लिए संध्या प्रार्थना करने से व्रत पूर्ण माना जाता है।