अवसर एवं देवता
परिचय
नामकरण संस्कार १६ प्रमुख संस्कारों में से एक है जो बच्चे के जन्म के ११वें या १२वें दिन किया जाता है। इससे बच्चे को उसकी ग्रह-दशा के अनुसार शुभ नाम और देवी-देवताओं का आरोग्य आशीर्वाद मिलता है।
नामकरण संस्कार सामग्री
- कांस्य या स्टील की थाली और बिना टूटे चावल
- शहद और सोने की अंगूठी/चम्मच
- माता और बच्चे के लिए नए वस्त्र
- पान का पत्ता, रोली और चंदन
- दीपक, अगरबत्ती और खीर
पूजा विधि — चरणबद्ध
चरण 1
सूर्य दर्शन एवं प्रथम प्रकाश आशीर्वाद
शास्त्रानुसार: शिशु को नए वस्त्र में लपेटें। पिता या बड़े बुजुर्ग शिशु को प्रातः सूर्य देव की किरणों के सम्मुख लाएं ताकि बालक को आरोग्य और ओज प्राप्त हो।
ॐ सूर्याय नमःॐ भास्कराय नमः
चरण 2
चावल की थाली पर नाम लेखन
थाली में चावल की परत बिछाएं। सोने की अंगूठी या हल्दी की गांठ से उस चावल पर बच्चे का नक्षत्र नाम और प्रचलित नाम लिखें।
ॐ श्री गणेशाय नमः
चरण 3
शिशु के दाहिने कान में नामकरण
पिता या माता शिशु के दाहिने कान पर पान का पत्ता रखकर ३ बार उसका शुभ नाम धीमे से बोलें और दीर्घायु होने का आशीर्वाद दें।
त्वं वेदांसि... (दीर्घायुर्भव शुभमस्तु)
चरण 4
मधुप्राशन एवं खीर प्रसाद वितरण
सोने की अंगूठी से शहद की एक बूंद बच्चे की जीभ पर लगाएं। कुलदेवी/षष्ठी देवी को खीर का भोग लगाएं और बड़े-बुजुर्ग अक्षत छिड़क कर बच्चे को आशीर्वाद दें।
ॐ आयुष्मान भव।