पर्व एवं देवता
महत्व
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के धरा पर आगमन और जन्मोत्सव का पावन पर्व है। घर में मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने से विघ्न दूर होते हैं, रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।
उत्सव सामग्री सूची
- पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की गणेश मूर्ति
- लकड़ी की चौकी और नया लाल या पीला कपड़ा
- तांबे का कलश, नारियल, आम के पत्ते और जल
- 21 दूर्वा (दूब घास) और 21 मोदक
- रोली, अक्षत, चंदन, जनेऊ और लाल गुड़हल के फूल
- कपूर, घी का दीपक, अगरबत्ती और धूप
पूजा विधि — चरणबद्ध
चरण 1
चौकी स्थापना एवं कलश स्थापना
शास्त्रानुसार: पूजा स्थान को स्वच्छ कर चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। रोली से स्वास्तिक बनाएं और उस पर चावल रखें। गणेश जी की मूर्ति को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर स्थापित करें। पास में जल से भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल रखकर कलश स्थापित करें।
कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः।मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥
चरण 2
प्राण प्रतिष्ठा एवं षोडशोपचार पूजा
भगवान गणेश का ध्यान करते हुए मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा भाव करें। इसके बाद पाद्य, अर्घ्य, आचमन कराएं। चंदन-रोली का तिलक लगाएं, जनेऊ पहनाएं, अक्षत छिड़कें और लाल गुड़हल के फूल अर्पित करें।
ॐ भूः भुवः स्वः सिद्धि-बुद्धि सहिताय श्री महागणपतये नमः।
चरण 3
दूर्वा एवं 21 मोदक अर्पण
गणेश जी को 21 दूर्वा की गांठें अर्पित करें। इसके बाद मुख्य प्रसाद के रूप में 21 उबले हुए मोदक या बेसन के लड्डू अर्पित करें।
ॐ गं गणपतये नमः दूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि।मोदकप्रियाय नमः।
चरण 4
आरती, विसर्जन संकल्प एवं आशीर्वाद
कपूर या घी के दीपक से 'जय गणेश देवा' आरती करें और घंटी बजाएं। पूरे परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें और 1.5, 3, 5 या 10 दिन के बाद घरेलू जलपात्र में पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन का संकल्प लें।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥