छोटा नचिकेता बहुत ही जिज्ञासु और समझदार लड़का था। उसने देखा कि उसके पिता यज्ञ में ऐसी बूढ़ी और कमज़ोर गायें दान कर रहे हैं जो किसी काम की नहीं थीं। नचिकेता ने साहस जुटाकर पूछा, 'पिताजी, आप मुझे किसे दान करेंगे?' गुस्से में पिता ने कह दिया, 'जाओ, मैं तुम्हें यमराज (मृत्यु के देवता) को सौंपता हूँ!' नचिकेता डरा नहीं, बल्कि सच का पालन करते हुए सीधे यमलोक पहुंच गया। वहां यमराज नहीं थे, इसलिए वह तीन दिन तक बिना कुछ खाए-पिए धैर्य से बैठा रहा। उसकी इस बहादुरी से खुश होकर यमराज ने उसे तीन वरदान मांगने को कहा। नचिकेता ने सोना-चांदी या राजपाट नहीं मांगा, बल्कि पूछा, 'मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है? जीवन का असली रहस्य क्या है?' यमराज ने प्रसन्न होकर उसे ब्रह्मांड का सबसे गहरा ज्ञान दिया।