कब और क्यों
पारंपरिक समय-नियम
हिन्दू मास भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
परंपरा · समय-नियम · सुरक्षित अभ्यास
पारंपरिक उद्देश्य: भगवान शिव के प्रति माता पार्वती की भक्ति का सम्मान करने और वैवाहिक सुख, पति की दीर्घायु तथा व्यक्तिगत आध्यात्मिक विकास के लिए प्रार्थना करने हेतु।
हिन्दू मास भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
यह नियम केवल परंपरागत आवृत्ति बताता है। स्थान-विशिष्ट तिथि के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।
पूरे दिन और पूरी रात के उपवास/जागरण को पूरा करने और व्रत खोलने से पहले अगले दिन सुबह की पूजा करने से व्रत पूर्ण माना जाता है।