वैदिक देवता · मंत्र परंपरा

वरुण

ब्रह्मांडीय जल, महासागरों के स्वामी और 'ऋत' (नैतिक कानून) के संरक्षक

13 अनुक्रमित उल्लेख

सार

दिशा, प्रतीक और आध्यात्मिक महत्त्व

दिशा

पश्चिम दिशा

प्रतीक / आयुध

पाश (फंदा), मकर वाहन, और छत्र

महत्त्व

जल तत्वों, अंतरात्मा की पवित्रता और नैतिक भूलों के लिए क्षमादान पर नियंत्रण रखते हैं।

विवरण

वरुण सबसे प्राचीन वैदिक देवताओं में से एक हैं, जो विशाल ब्रह्मांडीय महासागरों की देखरेख करते हैं और पूरे ब्रह्मांड में सत्य, धर्म तथा नैतिक नियमों (ऋत) को बनाए रखते हैं।

मंत्र

श्रद्धा से उच्चारण करें

ॐ वरुणाय नमः॥

Om Varunaya Namah

ब्रह्मांडीय जल और सत्य के संरक्षक भगवान वरुण को नमस्कार है।

वेद अनुसार

  • atharvaveda: 1
  • rigveda: 9
  • samaveda: 3

दर्शन / विषय

  • cosmic_order
  • protection
  • wisdom

संदर्भ ग्रंथ

नमूना मंत्र / सूक्त