वैदिक देवता · मंत्र परंपरा

ब्रह्मस्पति (बृहस्पति)

पवित्र प्रार्थना के स्वामी, दिव्य पुरोहित और देवताओं के गुरु

4 अनुक्रमित उल्लेख

सार

दिशा, प्रतीक और आध्यात्मिक महत्त्व

दिशा

ईशान्य दिशा (उत्तर-पूर्व)

प्रतीक / आयुध

स्वर्ण दंड, पवित्र शास्त्र, रुद्राक्ष माला, और प्रज्ञावान विद्वान आभा

महत्त्व

आध्यात्मिक मार्गदर्शन, वाक्पटुता, ज्ञान और शैक्षणिक प्रयासों में सफलता के लिए अत्यंत अनिवार्य।

विवरण

ब्रह्मस्पति (या बृहस्पति) पवित्र वाणी, प्रार्थना और अनुष्ठानिक मंत्रोच्चार के स्वामी हैं। वे दिव्य पुरोहित के रूप में कार्य करते हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रार्थनाएं देवताओं तक पहुंचें और बुद्धि का मार्गदर्शन धर्म व उच्च ज्ञान की ओर हो।

मंत्र

श्रद्धा से उच्चारण करें

ॐ बृहస్పतये नमः॥

Om Brihaspataye Namah

दिव्य गुरु और ज्ञान के शिक्षक भगवान बृहस्पति को नमस्कार है।

वेद अनुसार

  • rigveda: 3
  • samaveda: 1

दर्शन / विषय

  • ancestors
  • cosmic_order
  • royal_power
  • solar_light
  • soma_nectar
  • wisdom
  • yajna

संदर्भ ग्रंथ

नमूना मंत्र / सूक्त