वैदिक देवता · मंत्र परंपरा

आपः (दिव्य जल)

दिव्य माता के रूप में जल, पावन करने वाले और आरोग्य के स्रोत

8 अनुक्रमित उल्लेख

सार

दिशा, प्रतीक और आध्यात्मिक महत्त्व

दिशा

समस्त जल निकाय / पश्चिम

प्रतीक / आयुध

बहती हुई स्फटिक धाराएं, जीवनदायिन बूंदें, और पावन लहरें

महत्त्व

अनुष्ठानिक शुद्धि, आध्यात्मिक सफाई और शारीरिक आरोग्य स्नान के लिए अत्यंत आवश्यक।

विवरण

वैदिक ग्रंथों में, 'आपः' (जल) को दिव्य माताओं और हीलिंग देवियों के रूप में मानवीकृत किया गया है जो भौतिक अशुद्धियों और नैतिक अपराधों को धो देती हैं, तथा समस्त जीवों तक जीवन व चिकित्सीय ऊर्जा पहुंचाती हैं।

मंत्र

श्रद्धा से उच्चारण करें

ॐ आपो देवीरुपमध्वम॥

Om Apo Devir Upadhwama

दिव्य जल रूपी माताओं और पावन करने वाली देवियों को नमस्कार है।

वेद अनुसार

  • rigveda: 4
  • samaveda: 4

दर्शन / विषय

  • agni_kindling
  • cosmic_order
  • harmony
  • healing
  • protection
  • royal_power
  • solar_light
  • soma_nectar
  • wisdom
  • yajna

संदर्भ ग्रंथ

नमूना मंत्र / सूक्त