दिशा
आग्नेय दिशा (दक्षिण-पूर्व)
वैदिक देवता · मंत्र परंपरा
अग्नि देव, दिव्य संदेशवाहक और आहुतियों के प्रेषक
दिशा, प्रतीक और आध्यात्मिक महत्त्व
दिशा
आग्नेय दिशा (दक्षिण-पूर्व)
प्रतीक / आयुध
ज्वालाएं, दो सिर (अग्नि की दोहरी प्रकृति के प्रतीक), मेढ़ा वाहन, और अग्नि शलाका या स्रुवा
महत्त्व
सभी पवित्र अनुष्ठानों, होम और यज्ञों के लिए अनिवार्य; आंतरिक रूपांतरण, पवित्रता और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक।
अग्नि वेदों के प्रमुख देवता हैं जो मनुष्य और दिव्य लोकों के बीच दिव्य सेतु का काम करते हैं। भौतिक अग्नि में डाली जाने वाली प्रत्येक आहुति को अग्नि देव संबंधित देवताओं और पितरों तक पहुंचाते हैं।
श्रद्धा से उच्चारण करें
ॐ अग्ने महासपत्नघ्न विधूनय च मे शत्रून्। उग्रो हि वेधा असि॥
Om Agne Mahasapatnaghna Vidhoonaya Cha Me Shatroon / Ugro Hi Vedha Asi
हे अग्नि देव! बाधाओं और शत्रुओं का नाश करने वाले, हमारी रक्षा करें और हमें दिव्य शक्ति प्रदान करें।