Varanasi (Kashi) · India
काशी विश्वनाथ मंदिर
Lord Shiva (Vishveshvara / Lord of the Universe - Jyotirlinga)
आध्यात्मिक दर्शन
मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल की नोक पर बसी मुक्ति क्षेत्र है। यहाँ देहत्याग करने वाले जीव के कान में स्वयं भगवान शिव 'तारक मंत्र' फूंककर उसे जन्म-मरण के चक्र से सदा के लिए मुक्त कर देते हैं।
वास्तुकला एवं संरचना
Classical North Indian Temple & Modern Vishwanath Corridor
महाराजा रणजीत सिंह द्वारा दिए गए १,००० किग्रा सोने से मढ़ा हुआ स्वर्ण शिखर। १७८० में महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्मित और अब भव्य 'काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर' द्वारा गंगा घाटों से सीधा जुड़ा हुआ।
पवित्र मंत्र (संस्कृत)
दर्शन के लिए जाएँ
पवित्र ज्योतिर्लिंग का स्पर्श दर्शन, दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती का अनुभव, मणिकर्णिका घाट पर स्नान और दिव्य सप्तऋषि आरती में भाग लेना।
विशेष अनुष्ठान एवं पूजा
- Mangala Aarti (3:00 AM to 4:00 AM)
- Bhog Aarti (11:30 AM to 12:30 PM)
- Saptarishi Aarti (7:00 PM to 8:30 PM - Performers simulate 7 celestial sages)
- Shringara & Shayana Aarti (Night slumber ritual)
पर्व एवं समय
- Mahashivratri (Grand night of Shiva-Parvati wedding procession)
- Dev Deepavali (Kartik Poornima - Million lamps on all Ganga ghats)
- Rangbhari Ekadashi (Shiva returning with Parvati to Kashi playing gulal)
- Daily Temple Timings: 3:00 AM to 11:00 PM
पोशाक एवं दिशानिर्देश
मर्यादित वस्त्र। स्पर्श दर्शन हेतु पुरुषों के लिए बिना सिला धोती-कुर्ता और महिलाओं के लिए साड़ी/सलवार-सूट। मंदिर गर्भगृह में चमड़े का सामान (बेल्ट, पर्स) पूरी तरह वर्जित है।