पर्व एवं देवता
महत्व
जन्माष्टमी श्री कृष्ण के मध्यरात्रि जन्मोत्सव का पावन पर्व है। इस दिन लड्डू गोपाल का पंचामृत स्नान और झूले में झुलाने से घर में वात्सल्य, आनंद और सुख का वास होता है।
उत्सव सामग्री सूची
- लड्डू गोपाल की मूर्ति और सजाया हुआ झूला
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर का मिश्रण)
- ताज़ा माखन और मिश्री
- धनिया पंजीरी और तुलसी पत्र
- मोर पंख और छोटी बांसुरी
- नयी पीली पोशाक और फूल
पूजा विधि — चरणबद्ध
चरण 1
मध्यरात्रि पंचामृत स्नान
शास्त्रानुसार: रात्रि 12 बजे लड्डू गोपाल को पात्र में रखें। 'क्लीं कृष्णाय नमः' बोलते हुए पंचामृत से स्नान कराएं। तत्पश्चात शुद्ध जल से स्नान कराएं।
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः।
चरण 2
श्रृंगार एवं झूला स्थापना
गोपाल जी को स्वच्छ वस्त्र से पोंछें। नयी पीली पोशाक पहनाएं, मोर पंख, बांसुरी लगाएं और चंदन का तिलक करें। उन्हें सजे हुए झूले में विराजित करें।
कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभम्।नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्॥
चरण 3
माखन-मिश्री एवं पंजीरी भोग
ताज़े सफेद माखन, मिश्री और धनिया पंजीरी का भोग लगाएं। प्रत्येक भोग पर तुलसी का पत्ता अवश्य रखें।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
चरण 4
झूला झुलाना एवं आरती
प्रेमपूर्वक झूले की डोरी खींचकर बाल गोपाल को झुलाएं और भजन गाएं। कपूर जलाकर आरती करें और पंचामृत प्रसाद बांटें।
नन्द घर आनन्द भय जय कन्हैया लाल की।हाथी दीना घोड़ा दीना और दीना पालकी॥