एक घने जंगल में जब भीषण सूखा पड़ा और तालाब सूखने लगे, तो एक बातूनी कछुआ बहुत परेशान हुआ। उसके दो अच्छे दोस्त हंस पक्षी थे, जो उड़कर एक दूर हरे-भरे झील पर जा रहे थे। कछुए ने जिद्द की कि उसे भी साथ ले चलो। हंसों ने एक तरकीब सोची: 'हम अपनी चोंच से एक मजबूत लकड़ी के दोनों सिरे पकड़ेंगे और तुम बीच से उसे अपने मुंह से कसकर पकड़ लेना। लेकिन याद रखना, रास्ते में भूलकर भी अपना मुंह मत खोलना वरना नीचे गिर जाओगे!' वे आसमान में उड़ चले। नीचे खड़े बच्चों ने ताली बजाई और चिल्लाए, 'अरे देखो, हंस कछुए को ले जा रहे हैं!' घमंडी कछुआ खुद को रोक न सका और चिल्लाने के लिए मुंह खोला—'अरे, ये मेरे दोस्त हैं!' और जैसे ही उसने मुंह खोला, वह नीचे आ गिरा!