एक बातूनी और घमंडी कौवा झील के पास शेखी बघार रहा था, 'मैं आसमान में तरह-तरह के करतब दिखा सकता हूं, कभी गोल घूमता हूं, कभी गोता लगाता हूं!' उसने पास तैरते शांत हंस से पूछा, 'क्या तुम ऐसे उड़ सकते हो?' हंस ने मुस्कुराकर कहा, 'नहीं, मुझे इतने सारे करतब नहीं आते, लेकिन मैं अपनी उड़ान से सीधे समंदर और ऊंचे पहाड़ पार कर लेता हूं।' तभी एक तेज आंधी और तूफान आया। कौवे के सारे करतब ध धरे रह गए और वह हवा में उड़ने के लिए संघर्ष करने लगा। वहीं, हंस ने शांति से अपने पंख फैलाए और तूफान को चीरकर सुरक्षित पार निकल गया।