पहाड़ से बहती हुई एक नदी के रास्ते में एक जिद्दी और कठोर चट्टान आ गई। चट्टान ने हंसकर कहा, 'तुम बहुत कोमल हो, मुझे कभी नहीं हटा सकती!' नदी ने कोई बहस नहीं की। वह चुपचाप अपना रास्ता बनाकर बहती रही और दिन-रात धीरे-धीरे उस चट्टान को छूती रही। सालों बीत गए—वही कोमल पानी उस कठोर चट्टान को बीच से काटकर रास्ता बना चुका था। इससे यह सीख मिलती है कि लगातार कोशिश और लचीलापन कठोर से कठोर बाधा को भी हरा देता है।