Fables & Focus

दिवास्वप्न देखने वाले ब्राह्मण की सीख

पात्र: A Daydreaming Brahmin

एक गरीब ब्राह्मण को भीख में चावल का एक घड़ा मिला। उसने उसे दीवार पर टांग दिया और लेटकर बड़े-बड़े सपने देखने लगा—'मैं इसे बेचकर बकरियां खरीदूंगा, फिर अमीर बनूंगा, महल बनाऊंगा और कोई गलती करेगा तो उसे ऐसे लात मारूंगा!' सपने में ही उसने गुस्से में पैर हवा में चलाया। *छपाक!* उसका पैर असली घड़े पर लग गया और घड़ा टूटकर सारे चावल जमीन पर बिखर गए। भविष्य के ख्याली पुलाव पकाने के चक्कर में उसका वर्तमान भी नष्ट हो गया।

इस कथा के मूल्य

  • Mindfulness
  • Staying Grounded
  • Focusing on the Present