एक गरीब ब्राह्मण को भीख में चावल का एक घड़ा मिला। उसने उसे दीवार पर टांग दिया और लेटकर बड़े-बड़े सपने देखने लगा—'मैं इसे बेचकर बकरियां खरीदूंगा, फिर अमीर बनूंगा, महल बनाऊंगा और कोई गलती करेगा तो उसे ऐसे लात मारूंगा!' सपने में ही उसने गुस्से में पैर हवा में चलाया। *छपाक!* उसका पैर असली घड़े पर लग गया और घड़ा टूटकर सारे चावल जमीन पर बिखर गए। भविष्य के ख्याली पुलाव पकाने के चक्कर में उसका वर्तमान भी नष्ट हो गया।