एक पारंपरिक कथा में संत एकनाथ गोदावरी नदी में स्नान करके शांत भाव से लौट रहे थे। एक क्रोधित व्यक्ति उनके धैर्य की परीक्षा लेना चाहता था और उसने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया। एकनाथ ने उत्तर में चिल्लाया नहीं। वे चुपचाप नदी पर लौटे, फिर स्नान किया और आगे बढ़ गए। उस व्यक्ति ने कई बार वही दुर्व्यवहार दोहराया, फिर भी एकनाथ ने बदला नहीं लिया। अंत में वह व्यक्ति लज्जित हुआ और क्षमा माँगी। एकनाथ ने घमंड के बजाय करुणा से उत्तर दिया। उनकी शांति का अर्थ यह नहीं था कि गलत व्यवहार ठीक था; इसका अर्थ था कि किसी और का क्रोध उनके निर्णयों को नियंत्रित नहीं कर सकता।