Epics (Mahabharata)

कर्ण का दानवीर स्वभाव

पात्र: Karna, Lord Indra

महाभारत के कर्ण अपने दानवीर स्वभाव के लिए जाने जाते थे—वे कभी किसी जरूरतमंद को खाली हाथ नहीं लौटाते थे। उनके पास जन्म से कवच और कुंडल थे जो उनकी रक्षा करते थे। भगवान इंद्र ने उनकी परीक्षा लेनी चाही। युद्ध से पहले इंद्र एक बूढ़े ब्राह्मण के रूप में आए और कर्ण से उनके वही रक्षक कवच-कुंडल दान में मांग लिए। कर्ण को पता था कि इसके बिना उनकी जान को खतरा हो सकता है, फिर भी उन्होंने एक पल सोचे बिना अपने शरीर से कवच काटकर दान कर दिया! उनकी इस महान ईमानदारी और त्याग को देखकर इंद्र भी हैरान रह गए।

इस कथा के मूल्य

  • Charity
  • Integrity
  • Honor
  • Selflessness