Saints & Devotees

कनकदास और कृष्ण की खिड़की

पात्र: Kanakadasa, Lord Krishna, Temple Community

कनकदास एक कवि और कृष्ण-भक्त थे, जो प्रेम से भजन गाते थे। पारंपरिक कथा के अनुसार, उस समय की सामाजिक प्रथाओं के कारण उन्हें उडुपी के एक मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया। उन्होंने अपमान का उत्तर क्रोध से नहीं दिया; वे बाहर खड़े होकर पूरे मन से कृष्ण का गान करते रहे। परंपरा में कहा जाता है कि कृष्ण की प्रतिमा दीवार की ओर मुड़ गई और एक छोटी खिड़की बन गई, जिससे कनकदास बाहर से दर्शन कर सके। यह स्थान कनकना किंडी—कनक की खिड़की—के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कथा सिखाती है कि भक्ति और मानवीय गरिमा को जन्म, पद या किसी द्वार में प्रवेश की अनुमति से नहीं आँका जा सकता।

इस कथा के मूल्य

  • Equality
  • Dignity
  • Faith
  • Inclusion