माता पार्वती की रक्षा करते हुए बाल गणेश और भगवान शिव के बीच अनजाने में युद्ध हो गया, जिससे गणेश जी का सिर अलग हो गया। माता के दुखी होने पर शिव जी ने अपने सेवकों को उत्तर दिशा में मिलने वाले पहले जीव का सिर लाने को कहा। वे एक बुद्धिमान हाथी का सिर ले आए, जिसे गणेश जी पर रख दिया गया। गणेश जी ने इस अचानक आए बदलाव से निराश होने के बजाय इसे गर्व से अपनाया। वही हाथी का सिर आगे चलकर बुद्धि और ज्ञान का प्रतीक बन गया।