तमिल कवयित्री-संत आंडाल की पारंपरिक कथा में उनके पिता पेरियालवार प्रतिदिन भगवान विष्णु के लिए ताज़े फूलों की माला बनाते थे। छोटी आंडाल भगवान से इतना प्रेम करती थीं कि मंदिर भेजने से पहले वे चुपचाप माला पहनकर दर्पण में देखतीं और सोचतीं कि क्या वे अपना सबसे सुंदर अर्पण दे रही हैं। जब पेरियालवार को यह पता चला, तो उन्हें चिंता हुई कि पहनी हुई माला भगवान को कैसे चढ़ाई जाए। उन्होंने नई माला बनाई। किंतु परंपरा कहती है कि भगवान विष्णु ने स्वप्न में वही माला माँगी जिसे आंडाल ने पहना था, क्योंकि उसमें उनकी सच्ची भक्ति बसी थी। तब पेरियालवार ने समझा कि प्रेमपूर्ण हृदय ही अर्पण को सबसे सुंदर बनाता है।