अध्याय 1
बालकांड (दिव्य प्राकट्य एवं प्रारंभिक बाल-लीला)
अयोध्या के राजा दशरथ ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया, जिससे चार दिव्य राजकुमारों—राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। ऋषि विश्वामित्र के साथ जाकर बालक राम ने ताड़का और सुबाहु का वध किया तथा माता अहल्या का उद्धार किया। जनकपुर में राजा जनक के दरबार में श्री राम ने भगवान शिव के धनुष का भंजन कर माता सीता से विवाह किया।
अध्याय 2
अयोध्या एवं अरण्यकांड (वनवास एवं सीता हरण)
श्री राम के राज्याभिषेक की पूर्व संध्या पर, मंथरा के बहकावे में आकर रानी कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे: राम को १४ वर्ष का वनवास और भरत को राजसिंहासन। श्री राम ने सहर्ष इसे स्वीकार किया और सीता तथा लक्ष्मण के साथ वन चले गए। भरत ने राज्य ठुकराकर राम की चरणपादुका को सिंहासन पर विराजमान किया। दंडकारण्य वन में रावण ने छल से सीताजी का हरण कर लिया, जिसके बाद राम ने जटायु और शबरी को मोक्ष प्रदान किया।
अध्याय 3
किष्किंधा, युद्ध एवं उत्तरकांड (सुग्रीव मितान, लंका युद्ध एवं रामराज्य)
किष्किंधा में श्री राम ने सुग्रीव और हनुमान से मित्रता की तथा बालि का उद्धार किया। वानर सेना ने समुद्र पर रामसेतु का निर्माण किया। लंका के महायुद्ध में श्री राम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की और विभीषण को लंका का राजा बनाया। १४ वर्ष पश्चात अयोध्या लौटकर उनका राज्याभिषेक हुआ, जिससे 'रामराज्य' की स्थापना हुई—जहाँ कोई दुखी, दरिद्र या अज्ञानी नहीं था।
पठन संदर्भ
कथा, पाठांतर और अभ्यास
यह सार्वजनिक गाइड एक संक्षिप्त भक्तिपूर्ण पुनर्कथन है। विभिन्न पुराणों, रामायण परंपराओं, क्षेत्रों और संप्रदायों में प्रसंग व विवरण अलग हो सकते हैं।
- पहले कथा पढ़ें, फिर नीचे दिए कथा-पाठ पर विचार करें।
- व्रत या विधिवत पाठ के लिए अपने परिवार या परंपरा के स्वीकृत संस्करण का प्रयोग करें।
- संबद्ध देवता गाइड से प्रतीक और उपासना संदर्भ समझें।