अणिमा शरीर को अणुवत सूक्ष्म करने की शक्ति है। व्यवहार में यह अहंकार और प्रतिरोध को घटाकर वहाँ पहुँचना है जहाँ केवल बल काम नहीं करता। हनुमान ने लंका के द्वारों से अदृश्य प्रवेश कर रावण की सेना के बीच विचरण किया—धर्म-सेवा में छिपा बल।
आंतरिक अणिमा: अहंकार में छोटा होना—सुना जाए, देखा जाए बिना सेवा करना।
Valmiki Ramayana, Sundara Kanda; Hanuman Chalisa 31
समुद्र-दुर्ग का निरीक्षण कर लंका में अदृश्य प्रवेश—आकार प्रदर्शन नहीं, नीति बन जाता है।