Certificate layout · Om Mangalam
यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति।
तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति॥
सरल अर्थ
जो सबमें पवित्रता देखे, और सबको पवित्र में जुड़े देखे, वह सच में छूटता नहीं — जुड़ाव संगति से गहरा होता है।
कब पढ़ें
अकेले शाम में: तुम फिर भी बड़े पूरे का हिस्सा हो।
आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन।
सुखं वा यदि वा दुःखं स योगी परमो मतः॥
सरल अर्थ
सबसे ऊँचा अभ्यास है दूसरों के सुख-दुख को अपने जैसे देखना — सहानुभूति जुड़ाव लौटाती है।
कब पढ़ें
जब अकेलापन कड़वाहट बने — एक कोमल संपर्क चुनो।
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