Certificate layout · Om Mangalam
मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणां
सुखदुःखपुण्यापुण्यविषयाणां
भावनातश्चित्तप्रसादनम्॥
सरल अर्थ
सुखी के प्रति मैत्री, दुखी के प्रति करुणा, पुण्य के प्रति मुदित भाव, और हानिकारक से स्वस्थ दूरी — इससे चित्त प्रसन्न होता है।
कब पढ़ें
जब सबके मूड सोख लो और थक जाओ।
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।
निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥
सरल अर्थ
द्वेष रहित मित्र बनो, अहंकार रहित करुणा रखो, सुख-दुख में सम रहो, क्षमाशील रहो — कोमल हृदय, दृढ़ केंद्र।
कब पढ़ें
किसी की मदद से पहले: पूरा ध्यान दो, खुद को मिटाए बिना।
← सभी जीवन श्लोक