सहानुभूति बिना थकान के

संवेदनशील का कवच

Shield for the Sensitive

देखभाल करने वालों, मित्रों जो सब महसूस करते हैं — और सीमाओं की ज़रूरत रखते हैं।

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योगसूत्र १.३३

मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणां
सुखदुःखपुण्यापुण्यविषयाणां
भावनातश्चित्तप्रसादनम्॥

सरल अर्थ

सुखी के प्रति मैत्री, दुखी के प्रति करुणा, पुण्य के प्रति मुदित भाव, और हानिकारक से स्वस्थ दूरी — इससे चित्त प्रसन्न होता है।

कब पढ़ें

जब सबके मूड सोख लो और थक जाओ।

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भगवद्गीता १२.१३

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।
निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥

सरल अर्थ

द्वेष रहित मित्र बनो, अहंकार रहित करुणा रखो, सुख-दुख में सम रहो, क्षमाशील रहो — कोमल हृदय, दृढ़ केंद्र।

कब पढ़ें

किसी की मदद से पहले: पूरा ध्यान दो, खुद को मिटाए बिना।

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