शोक, हृदय-व्यथा, पुनर्निर्माण
चोट के बाद उपचार
Healing After Hurt
हानि, बिछड़न, और फिर से पूरा होने की धीमी साधना के लिए।
Certificate layout · Om Mangalam
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-
न्यन्यानि संयाति नवानि देही॥
सरल अर्थ
जैसे पुराने वस्त्र छोड़ नए पहने जाते हैं, जीवन भी अंत से आरंभ की ओर जाता है। बदलाव पवित्र हो सकता है — भले दुख दे।
कब पढ़ें
शोक में: जो समाप्त हुआ उसे सम्मान दो, भविष्य से इनकार मत करो।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत॥
सरल अर्थ
जो आता है, वह जाता भी है। दर्द के साथ धैर्य कमजोरी नहीं — उपचार को समय देने का मार्ग है।
कब पढ़ें
कठिन वर्षगाँठों या अचानक उदासी की लहर पर।
← सभी जीवन श्लोक