Certificate layout · Om Mangalam
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः।
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते॥
सरल अर्थ
स्थिर मन दुख में घबराता नहीं, और सुख में बेतहाशा चिपकता नहीं। जब लालच, डर और क्रोध ढीले पड़ें, तब शांति संभव होती है।
कब पढ़ें
जब चिंता घूमने लगे और एक साफ़ साँस की ज़रूरत हो।
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत॥
सरल अर्थ
भावनाएँ आती-जाती हैं — जैसे गर्मी और ठंड। वे अस्थायी हैं। लहर बनने की बजाय, लहर को सह सकते हो।
कब पढ़ें
घबराहट के चरम पर: याद दिलाएँ — “यह भाव गुज़र जाएगा।”
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