भगवद्गीता १७.१५
अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्।
सरल अर्थ
सत्य, प्रिय और हितकर बोलो — बिना ज़रूरत के दूसरों को उत्तेजित किए।
कब पढ़ें
भेजने से पहले रुकें: क्या सत्य है? कोमल है? ज़रूरी है?
टकराव और सावधान वाणी
Before You Speak
मीटिंग, पारिवारिक बातचीत, और उन संदेशों के लिए जिनका पछतावा हो।
भगवद्गीता १७.१५
अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्।
सत्य, प्रिय और हितकर बोलो — बिना ज़रूरत के दूसरों को उत्तेजित किए।
भेजने से पहले रुकें: क्या सत्य है? कोमल है? ज़रूरी है?
वाणी पर पारंपरिक शिक्षा
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्। प्रियं च नानृतं ब्रूयादेष धर्मः सनातनः॥
सत्य और प्रिय कहो। सत्य को चोट पहुँचाने का हथियार मत बनाओ। झूठ को मीठा मत बनाओ। यही सनातन धर्म का संतुलन है।
घर या काम पर प्रतिक्रिया या असहमति में।