पावन कथा

देवी महात्म्यम् कथा (दुर्गा सप्तशती)

मार्कंडेय पुराण की पवित्र कथा जो भगवती आद्या शक्ति की सर्वोपरि महिमा का गान करती है। इसमें तीन प्रमुख चरित्रों द्वारा दर्शाया गया है कि कैसे देवी आसुरी शक्तियों का संहार करके धर्म, शांति और संतुलन की पुनस्थापना करती हैं।

संबद्ध देव-देवी

अध्याय 1

मधु-कैटभ वध (महाकाली चरित्र)

राज्य से वंचित राजा सुरथ और स्वजनों द्वारा ठगे गए वैश्य समाधि महर्षि मेधा के आश्रम में मिले। अपने-अपने कष्टों और मोह से दुखी होकर उन्होंने ऋिषि से मन के भ्रम का कारण पूछा। ऋषि मेधा ने भगवती महामाया की महिमा बताते हुए कहा कि जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे, तब उनके कान के मल से उत्पन्न मधु और कैटभ दैत्यों ने ब्रह्मा जी को मारने का प्रयास किया। ब्रह्मा जी की स्तुति से प्रसन्न होकर योगनिद्रा देवी विष्णु के शरीर से बाहर आईं, जिससे भगवान जागे और दैत्यों का वध किया।

पठन संदर्भ

कथा, पाठांतर और अभ्यास

यह सार्वजनिक गाइड एक संक्षिप्त भक्तिपूर्ण पुनर्कथन है। विभिन्न पुराणों, रामायण परंपराओं, क्षेत्रों और संप्रदायों में प्रसंग व विवरण अलग हो सकते हैं।

  • पहले कथा पढ़ें, फिर नीचे दिए कथा-पाठ पर विचार करें।
  • व्रत या विधिवत पाठ के लिए अपने परिवार या परंपरा के स्वीकृत संस्करण का प्रयोग करें।
  • संबद्ध देवता गाइड से प्रतीक और उपासना संदर्भ समझें।

कथा-पाठ

जब आसुरी अंधकार फैले, शक्ति सामूहिक तेज से व्यवस्था लौटाती है।

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