अध्याय 1
मधु-कैटभ वध (महाकाली चरित्र)
राज्य से वंचित राजा सुरथ और स्वजनों द्वारा ठगे गए वैश्य समाधि महर्षि मेधा के आश्रम में मिले। अपने-अपने कष्टों और मोह से दुखी होकर उन्होंने ऋिषि से मन के भ्रम का कारण पूछा। ऋषि मेधा ने भगवती महामाया की महिमा बताते हुए कहा कि जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे, तब उनके कान के मल से उत्पन्न मधु और कैटभ दैत्यों ने ब्रह्मा जी को मारने का प्रयास किया। ब्रह्मा जी की स्तुति से प्रसन्न होकर योगनिद्रा देवी विष्णु के शरीर से बाहर आईं, जिससे भगवान जागे और दैत्यों का वध किया।
अध्याय 2
महिषासुर मर्दिनी (महालक्ष्मी चरित्र)
महिषासुर नामक असुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। तब ब्रह्मा, विष्णु, शिव तथा समस्त देवताओं के तेज से एक अलौकिक दिव्य पुंज प्रकट हुआ, जिसने १८ हाथों वाली भगवती दुर्गा का रूप लिया। सभी देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्र देवी को भेंट किए। जब महिषासुर ने भैंसे, सिंह और हाथी के रूप बदलकर युद्ध किया, तब देवी ने अपने त्रिशूल से उसका वध कर देवताओं को भयमुक्त किया और 'महिषासुरमर्दिनी' कहलाईं।
अध्याय 3
शुंभ-निशुंभ एवं रक्तबीज वध (महासरस्वती चरित्र)
असुर शुंभ और निशुंभ ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया। जब उन्होंने देवी के रूप की प्रशंसा सुनी, तो विवाह का प्रस्ताव भेजा। देवी ने घोषणा की कि जो युद्ध में उन्हें पराजित करेगा, वही उनका स्वामी होगा। युद्ध में जब रक्तबीज नामक असुर के रक्त की हर बूंद भूमि पर गिरते ही नए दैत्य उत्पन्न करने लगी, तब भगवती कालिका (चामुंडा) ने प्रकट होकर उसके रक्त की बूंदों को भूमि पर गिरने से पहले ही पी लिया, जिससे देवी दुर्गा ने रक्तबीज तथा शुंभ-निशुंभ का अंत किया।
पठन संदर्भ
कथा, पाठांतर और अभ्यास
यह सार्वजनिक गाइड एक संक्षिप्त भक्तिपूर्ण पुनर्कथन है। विभिन्न पुराणों, रामायण परंपराओं, क्षेत्रों और संप्रदायों में प्रसंग व विवरण अलग हो सकते हैं।
- पहले कथा पढ़ें, फिर नीचे दिए कथा-पाठ पर विचार करें।
- व्रत या विधिवत पाठ के लिए अपने परिवार या परंपरा के स्वीकृत संस्करण का प्रयोग करें।
- संबद्ध देवता गाइड से प्रतीक और उपासना संदर्भ समझें।