कृष्ण

आरती कुञ्ज बिहारी की

Aarti Kunj Bihari Ki

Beloved Krishna aarti of the grove-dwelling Lord of Vrindavan.

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OM MANGALAM
ॐ नमो नारायणाय
  1. आरती कुञ्ज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
  2. गले में बैजन्ती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
    श्रवण कुण्डल झलकत कानों में, नन्द के आनन्द नन्दलाला की॥
    आरती कुञ्ज बिहारी की॥
  3. कन्हैया को काले घन की छटा, अँग-अंग अँगराई लटा।
    मोर मुकुट माला तिलक सोहे, घुँघरू बाजत बाँसुरी की॥
    आरती कुञ्ज बिहारी की॥
  4. गगन सम अंग काँति काली, राधिका चमक रही आली।
    लतन में ठाढ़े अरिज दलन, नवनीत चोर गोपाला की॥
    आरती कुञ्ज बिहारी की॥
  5. जहाँ तेज प्रगटे घनश्याम की, जहाँ राधिका संग श्याम की।
    भक्तन के मन भावत निरखत, आरती कुञ्ज बिहारी की॥
ॐ नमो नारायणाय

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